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हर तिमाही में कट रही है राजपूताना में राजपूती मूंछ

जयपुर के सिटी पैलेस से लेकर बाडमेर तक, राजस्थान में राजपूत अपनी मूंछों को लेकर चिंतित है। मूंछे जो राजपूती आन, बान और शान का प्रतीक मानी जाती है। आम राजपूत हमेशा से एक किसान रहा है औऱ सैनिक केवल तब बनता था, जब गांव में ढोल बज जाता था।

राजस्थान में भाजपा के रंग में रंगा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

संघ वालों के तीन ही काम - भोजन, भाषण और विश्राम। पर अब वो बाते नही रही। संघ काम में जुटा है पर राष्ट्र निर्माण में नही बल्कि भारतीय जनता पार्टी के राज को लाने और बनाये रखने में। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक सांस्कृतिक संस्था है जो भारतवर्ष में

ज्योति मिर्धा – विरासत की सीढ़ी से महत्वकांक्षा के भार की कहानी

खग वाहूं उलझै घणी, मैंगल रहिया घूम। नणदल, ऊंची बांध दो, बाजूबंद री लूंम।। राजनीति किसी युद्ध से कम नही और राजनीति के मैदान में जब योद्धा महिला हो तो देखने वालों की नजरे और नजरियां दोनों ही अलग तरह का होता है। राजस्थान की राजनीति में गायत्री देवी के जमाने से ही महिलाओं

हनुमान बेनीवाल – डूबती भाजपा के लिए फायदे का सौदा

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जमूरे औऱ जोकर पालने का शौक है। भोकनें वाले कुत्तों को वो गोली मार दिया करती है। हनुमान बेनीवाल उनके हाथों का जमूरा है या नही यह सीधे सीधे कहना मुश्किल है पर  भाजपा और संघ से  बेनीवाल की करीबी कई बार  उन पर

मगरा क्षेत्र – राजनीति के भागीरथ की अनवरत तलाश में

भाजपा और कांग्रेस की चुनावी जंग का बिगुल राजस्थान में बज चुका है। जातियों के समीकरण और उन पर आधारित दावेदारियों की बहस अब पार्टी दफ्तरों, नेताओं के घरों और चाय की थड़ियों पर लड़ते पत्रकारों के बीच अनसुनी करने के बावजूद भी सुनाई दे ही जाती है। पर राजस्थान

मानवेन्द्र सिंह –  कड़क कॉफी के प्याले में उठे तूफान की नियति बीड़ी के धुंए में उड़ जाना है

कई लोगों के ये नही पता होगा कि जसवंत सिंह ने कभी बाड़मेर से कोई भी चुनाव नहीं जीता। बाड़मेर में अब जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह एक राजनीतिक तूफान पैदा करना चाहते है। साल 2014 के आम चुनाव के दौरान बाड़मेर में जसवंत सिंह ने अपनी पार्टी के

Maggu: A Storm in Black Coffee Cup may end up in Bidi smoke

Manvendra Singh, son of Jaswant Singh, in Barmer is brewing a political storm of sort. The limelight was on Barmer during 2014 general election when Jaswant Singh defied the order of the party, he was a founding member of, and fought election as independent. Polarisation in Barmer politics had peaked

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