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मारवाड़ में मोदी लहर बनी मृगमरिचिका

मारवाड़ के लू के थपेड़ो औऱ  राजनीति के गहरे बहते पानी के बीच मोदी लहर ठंडी सी पड गयी है। मारवाड़ की पांच लोकसभा सीटों में से तीन पर मोदी लहर का असर केवल मृगमरिचिका बन चुका है। यानि दिखाई तो दे रहा है पर वास्तविकता में है नही। मारवाड़

राजेन्द्र राठौड – राजनीति के जोकर के बदलते रंग

राजनीति की ताश में जोकर का रंग जरुर बदल सकता है पर उसकी औकात भी बदल जाए, ये जरुरी नही। ताश के खेल – पोकर, में जोकर का इस्तेमाल तिकड़ी बनाने के लिए तो किया जाता है पर जोकर कभी तुरुप नही होता। राजस्थान की राजनीति में राजेन्द्र राठौड का

ज्यादा जहरीले सांप को पहले मारेगा नागौर का राजपूत

रेसम री ड़ोरी करै, नित-प्रति लावै धोय...। खूंटै बन्धै हेम रै, गधो तुंरग ना होय...।। बात तो पते की है पर अमित शाह ने मारवाड की सयानी बाते शायद कभी सुनी नही होगी। यही कारण है कि हनुमान बेनीवाल औऱ अमित शाह की सौदेबाजी ने मारवाड़ में चुनाव का रंग बदल

ज्योति या हडुमान – नागौर का जाट धर्म संकट में

मारवाड़ ने नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा और रामरघुनाथ चौधरी जैसे दिग्गज नेता देखे है, पर जाट राजनीति में ऐसा संकट कभी नही आया। इस बार नागौर के जाट को अपना राजनीतिक भविष्य तय करना है। नागौर का जाट ये तय़ करेगा कि वो हनुमान बेनीवाल के संघर्ष के

राजस्थान में राजपूत स्वाभिमान की लडाई नागौर पहुंची

ना कोई लीड़र है और ना ही कोई बैनर, पर राजपूतो के स्वाभिमान की असली लड़ाई अब राजस्थान की सत्ता के केन्द्र – नागौर में लड़ी जाय़ेगी। इतिहास गवाह है कि मारवाड का राज भले ही जोधपुर से चलता हो पर जब भी युद्ध का ढोल गांवों में बजाया जाता

हनुमान बेनीवाल – वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।।

वणज करैला वाणियां, और करैला रीस..। वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।। कहावत पुरानी है पर नागौर के हडुमान बेनीवाल पर सटीक बैठती है। राजनीति का धंधा करने में नाम तो कमाया पर जब फायदे नुकसान की बात आयी, तो गांठ का माल खो दिया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी

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