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अशोक गहलोत को गियर बदलना होगा !!

राजनीति के माहिर खिलाड़ी अशोक गहलोत के लिए आगे का रास्ता पुराने तौर तरीके छोड, नयी सोच और युवाओं के साथ आगे बढने पर निर्भर करेगा।

राजस्थान में संगठन मंत्री के आम होते चर्चे !!

कृशः कायः खण्जः श्रवणरहितः पुच्छविकलो, व्रणी पूयक्लिन्नः कृमिकुलशतैरावृततनुः। क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरजकपालर्पितगलः, शुनीमन्वेति श्वा इतमपि च हन्त्येव मदनः।। किसी जमाने में संगठन मंत्री होने का मतलब होता था कि भाईसाहब का आदर सर्वोपरि है औऱ भाईसाहब विचार-परिवार के प्रतिनिधी होने के साथ साथ रीति-नीति के वाहक भी है। पर, सूत्रो की माने

उपचुनाव के नतीजों ने दिए जाट राजनीति की बदलती हुई हवा के संकेत।

वणज करैला वाणियां, और करैला रीस..। वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।। हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई नारायण की नैया किसी तरह से पार लगाने में सफलता तो पायी, पर खींवसर के उपचुनावों में बेनीवाल की पोल भी खुल कर सामने आ गयी। अगर बोगस वोटिंग नही तो

सतीश पूनियां की ताजपोशी ऱाजस्थान में वसुंधरा युग के अंत की शुरुआत है।

तीन महीनों के इंतजार के बाद राजस्थान में भाजपा के नये अध्यक्ष की घोषणा हो गई। सतीश पूनियां को राजस्थान में भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। चार चुनाव हारने के बाद आखिरकार 2018 में आमेर जैसी कठिन सीट से चुनाव जीत कर विधायक बने सतीश पूनियां के लिए संघर्ष

अशोक गहलोत की अग्नि परीक्षा होगी आने वाली सर्दियां।।

राजनीति में कुछ लोग वक्त के साथ कुछ लोग बदल नही पाते पर फिर बाद में उन्हे पता चलता है कि वक्त बदल चुका है। ऐसे ही एक शख्स है, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और आने वाली सर्दिया उनके लिए राजनीतिक शीतकाल की शुरुआत साबित हो सकती है। गहलोत को

मोदी लहर से राजस्थान के कई राजनीतिक सितारे गर्दिश में

2014 के चुनावों ने भारत की राजनीति को बदल कर रख दिया। पर 2019 के चुनाव उससे भी महत्वपूर्ण है क्योकि ये चुनाव राजनीति की दिशा को बदल देगें। मोदी लहर की शुरुआत राजस्थान में दिसम्बर 2013 के विधानसभा चुनावों के साथ हुई पर राजस्थान के लिए 2014 से 2019

नागौर को चुनना है: बेनीवाल-ब्रांड़ संघर्ष या बाबा की पोती ज्योति मिर्धा ।।

पावणा ने फलका खुवाना है, इंतजार करे। ज्योति मेरी बहन है, पर मायरा एक ही भरा जाता है। ज्यादा बेटी पीहर में अच्छी नही लगती। ये कहना है हनुमान बेनीवाल का। नागौर के युवाओं के प्रतिनिधि होने का वे दावा करते है पर उनकी सोच अभी तक दकियानूसी ही है। जाट

मारवाड़ में मोदी लहर बनी मृगमरिचिका

मारवाड़ के लू के थपेड़ो औऱ  राजनीति के गहरे बहते पानी के बीच मोदी लहर ठंडी सी पड गयी है। मारवाड़ की पांच लोकसभा सीटों में से तीन पर मोदी लहर का असर केवल मृगमरिचिका बन चुका है। यानि दिखाई तो दे रहा है पर वास्तविकता में है नही। मारवाड़

राजेन्द्र राठौड – राजनीति के जोकर के बदलते रंग

राजनीति की ताश में जोकर का रंग जरुर बदल सकता है पर उसकी औकात भी बदल जाए, ये जरुरी नही। ताश के खेल – पोकर, में जोकर का इस्तेमाल तिकड़ी बनाने के लिए तो किया जाता है पर जोकर कभी तुरुप नही होता। राजस्थान की राजनीति में राजेन्द्र राठौड का

ज्यादा जहरीले सांप को पहले मारेगा नागौर का राजपूत

रेसम री ड़ोरी करै, नित-प्रति लावै धोय...। खूंटै बन्धै हेम रै, गधो तुंरग ना होय...।। बात तो पते की है पर अमित शाह ने मारवाड की सयानी बाते शायद कभी सुनी नही होगी। यही कारण है कि हनुमान बेनीवाल औऱ अमित शाह की सौदेबाजी ने मारवाड़ में चुनाव का रंग बदल

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