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मानवेन्द्र सिंहः राजनीति के लिक्विड़ ऑक्सीजन में

पहले वे आपसे असहमत होते है, फिर विरोध करते है, फिर वे आपकी हत्या करते है औऱ बाद में आपको पूजने लगते है। ये है किसी भी व्यक्ति के महान से महात्मा बनने की सीढीयां। पर महानता की ओऱ अग्रसर किसी व्यक्ति को अगर लिक्विड़ ऑक्सीजन में ड़ाल दिया जाये तो महानता का लिक्विड़ उसे जीने नही देता औऱ ऑक्सीजन उसे मरने नही देती। राजस्थान के दिग्गज राजपूत नेता औऱ धौलपुर की रानी वसुंधरा राजे के खिलाफ तलवार म्यान से खींचने वाले मानवेन्द्र सिंह की स्थिती भी शायद यही है। ये मास्टर स्ट्रोक जिसका भी है, वो मास्टर प़ालिटिशियन है, इसमें कोई दो राय नही है।

कलम कसाईयों के माने तो अहमद पटेल को शुक्रवार रात सपना आया कि कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए राजपूत योद्धा को वे जंग में भेजना तो भूल ही गये। पटेल ने अपने दिल की बात मुकुल वासनिक को बतायी, जिन्होने तुरन्त ऐके एंटोनी को फोन किया। सूरज आसमान से आने से पहले ही कांग्रेस के दिग्गजों ने वसुंधरा राजे के लिए एक तगड़ी बिसात बिछा दी थी। मानवेन्द्र सिंह ने बड़ी ही शालीनता से एक अच्छे सैनिक की तरह अपनी नयी पार्टी का आदेश स्वीकार किया। वैसे ये बात अलग है कि उनके पास और कोई ऑप्शन भी नही था।

युद्ध का मैदान भी तैयार है औऱ योद्धा भी, औऱ महाभारत फिर से सत्रह दिन ही चलेगी।

मानवेन्द्र सिंह एक अच्छे योद्धा साबित होगे ये निश्चित है। मानवेन्द्र सिंह अगर झालरापाटन जीत जाते है तो कांग्रेस की राजनीति में सचिन पायलट से भी आगे के पायदान पर पहुंच जायेगें। अगर हार जाते है तो उनके पास बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑप्शन खुला है। पर, 2019 की बिसात विधानसभा चुनावों के रिजल्ट आने के बाद बिछेगी। वैसे लूणी का पानी अरब सागर में जाता है और चन्द्रभागा नदी का पानी बंगाल की खाड़ी में।

मानवेन्द्र सिंह से पहले भी रमा पायलट ने झालरापाटन से 2003 में चुनाव लड़ा था। वसुंधरा राजे उस समय नौसिखिया मानी जाती थी, पर आज राजस्थान की भाजपा में अगर कोई मर्द है तो – वसुंधरा राजे। ऐसे में मानवेन्द्र सिंह निश्चित रुप से उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगा क्योकि राजपूत, मुस्लिम, गुर्जर, राजपूत, कलबी और दलित कई ऐसे समुदाय है जो कि मानवेन्द्र सिंह के साथ खड़े होगे। सचिन पायलट की भी परीक्षा रहेगी कि वे गुर्जर वोटों को अपनी करीबी मानवेन्द्र सिंह के पक्ष में ड़लवाने का बीड़ा उठाये।

रही बात मानवेन्द सिंह की, तो वे अपने लाव लश्कर के साथ सोमवार को अपना फार्म भरेगे औऱ अगले सत्रह दिन तक झालरापाटन की महाभारत में लड़ेगें। शैलेन्द्र यादव को अपना सारथी बनाना, मानवेन्द्र सिंह के लिए फायदे का सौदा होगा। वसुंधरा राजे की जान सांसत में रहेगी, जैसी की आन्नदपाल हत्याकाण्ड़ के बाद रही थी।

नतीजा चाहे जो भी हो, वसुंधरा राजे से उनकी दुश्मनी अब आर पार की लड़ाई है। ये तय है कि वसुंधरा राजे की नजर उन पर जीवन भर रहेगी। मतलब ये कि वसुंधरा राजे अब उन्हे चैन से जीने नही देगी और कांग्रेस पार्टी उन्हे राजनीतिक रुप से मरने नही देगी।

मानवेन्द्र सिंह को लिक्विड़ आक्सीजन में जीना सीखना होगा। या शायद, पिता की तरह राजनीति के वेन्टीलेटर पर। वे सैनिक है और मारवाड़ को विश्वास है कि हार नही मानेगें।

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