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सचिन पायलट पर लगे आरोपों की सच्चाई अभी तक साबित नही

मी टू कैंपेन के जमाने में जब सभी राजनेता देश में महिलाओं के स्वाभिमान के समर्थन में ट्वीटर पर बयान जारी कर रहे है वही एक ट्वीट राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री सचिन पायलट के गले की हड्डी बन गया है। 13 अक्टूबर को सचिन पायलट ने मी टू कैंपेन के समर्थन में ट्वीट किया पर उसका जवाब दिया ड़ॉ गौरव प्रधान ने जिन्होने सवाल उठा दिया कि क्या सचिन पॉयलट को उनकी पत्नी सारा ने इसलिए छोड़ दिया क्योकि वे एक नौकरानी के साथ रंगे हाथों पकड़े गये थे। डॉ प्रधान ने अपने ट्वीट में सचिन को चेताया कि क्या होगा अगर नौकरानी ने मी टू कैंपेन के बाद दुनिया के सामने उनकी पोल खोल दी। चेतावनी अपनी जगह है पर जब तक साबित नही हो जाये, इस तरह के आरोपों की सच्चाई या  बिना आधार के इन तथ्यों पर विश्वास करना मुश्किल है। किसी भी राजनैतिक व्यक्तित्व पर इस तरह के आरोप लगा देना काफी आसान है। किसी को सही कहानी मालूम नही होती, कोई पूछने भी नही जाता। सभी चटकारे लेकर उसे आगे बढा देते है।   

राजस्थान, सारा पॉयलट के बारे में उतना ही जानता है जितना कि हेमन्त सिंह धौलपुर के बारे में।

सारा पॉयलट करीब पांच फुट दस इंच की है, तन कर चलती है औऱ उनका आत्मविश्वास उनकी चाल में छिपाये नही छिपता। आंखों में आंखे ड़ाल कर बिना पलके छपकाये बात करना सारा के व्यक्तित्व का हिस्सा है। बाहरी लोगों के बीच वे ज्यादा नही बोलती पर जब वे करीबी लोगों में होती हैं तो अपने मन की बात बिंदास तरीके के रखती है। सारा, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला और उनकी अंग्रेज पत्नी मौली की बेटी है। उमर, साफिया औऱ हीना उनके भाई बहन है। सारा ने सचिन राजेश्वरसिंह विधुड़ी से 2004 में अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी की। अब्दुल्ला परिवार सचिन पॉयलट से शादी के खिलाफ था हालांकि वे राजेश प़ॉयलट औऱ उनके परिवार को बरसों से जानते थे। सारा औऱ सचिन पायलट के दो बेटे है – दस साल का आराण और छह साल का विहान।

सारा का जन्म कश्मीर में हुआ और जब कश्मीर में हालात बिगड़े तो 1990 में करीब बारह साल की उम्र में वे लंदन चली गयी। सारा ने होटल मेनेजमेन्ट ग्रेजुएट है औऱ उन्होने इंटरनेशनल रिलेशन्स में मास्टर डिग्री लंदन से की है। उन्होने शुरु में यूनाईटेड़ नेशन्स वूमन के लिए काम किया पर अब अपना एनजीओ – सेन्टर फॉर इक्वीटी एंड़ इन्क्लूजन चलाती है। महिलाओं से जुड़े मुद्दे सारा पॉयलट के दिल के करीब है औऱ उनका काम भी समाज में पिछड़ी महिलाओं के जीवन उत्थान पर केन्द्रित है। सारा पॉयलट एक योग गुरु भी है औऱ दिल्ली में विनयसा योग औऱ हठ योग की क्लास लगाती है। योग का ये रुप, जीवन में विकेन्द्रिकृत उर्जा को बैलेंस रखने पर केन्द्रित है औऱ सारा पॉय़लट योग औऱ अपने जीवन में इसे बखूबी निभा रही है।

सारा और सचिन पहली बार लंदन में 1998-99 में मिले, जब सचिन पॉयलट अमेरिका में वाहर्टन स्कूल से एमबीए कर रहे थे। नजरे मिली, प्यार परवान चढ़ा औऱ दोनों ने फोन औऱ ईमेल के जरिये एक दूसरे को जाना। हालांकि अब्दुल्ला औऱ पॉयलट परिवार एक दूसरे को दशकों से जानता था पर इससे पहले सचिन औऱ सारा की व्यक्तिगत मुलाकात नही हुई थी। सारा का कहना है कि सचिन पायलट ने राजनीति में जाने के बारे में कभी उनसे कभी सीधा सीधा इशारा नही किया। पर, उन्हे कभी इस बात से परेशानी भी नही थी क्योकि वे बचपन से ही राजनीति को करीब से देखती आयी थी। क्या सचिन पायलट ने अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा के बारे में सारा से झूट बोला, ये पूछने का हक हमें नही।

दौसा में यह सभी को पता था कि रमा पायलट अपने बेटे की राजनीति को बचाये ऱखने के लिए दौसा उपचुनाव में उतरी थी क्योकि सचिन पायलट उस समय केवल तैईस साल के थे। साल 2000 में राजेश पायलट की सड़क हादसे में मौत के बाद उनकी पत्नी रमा ने दौसा से उपचुनाव लड़ा औऱ भारी बहुमत से जीता।

सारा औऱ सचिन पायलट की कहानी एक फैयरीटेल की तरह थी। एक परफैक्ट लव स्टोरी थी पर 2013-14 में शायद इस खूबसूरत जोड़ी को नजर लग गयी। ये बात उस वक्त की है जब सचिन पायलट कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। जानकारों का मानना है कि सचिन पायलट फिसले तो फिसलते ही चले गये। दिल्ली के क्लब सर्किल में आम चर्चा वही है जो कि गौरव प्रधान ने अपनी ट्वीट में कही। चर्चा ये कि सचिन पायलट को एक नही बल्कि तीन बार सारा ने रंगे हाथों 3, सफदर जंग रोड़ स्थित घर में ही पकड़ा। ये बंगला सचिन को एक मंत्री की हैसियत से अलोटेड़ था। हद तब हो गयी जब सारा उस पार्किंग लॉट में पहुंच गयी जहां प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सचिन पायलट मध्यप्रदेश की एक ‘बाईसा’ के साथ थे, जो कि पेशे से एक पत्रकार थी। पर ये सब सुनी सुनाई बाते है जिनका कोई सिर पैर नही। मुद्दे की बात ये है कि सारा ने अपना फैसला ले लिय़ा था।  वे फारुख अब्दुल्ला के दिल्ली के जनपथ पर सागर अपार्टमेन्ट में अपने बेटों के साथ रहने लगी। कुछ समय पहले तक सारा पायलट परिवार की तीन कंपनियों में ड़ायरेक्टर भी थी पर अब नही है। सचिन पायलट का राजनीतिक सफर का ग्राफ भी उसके बाद गिरा। वे अजमेर से चुनाव हार गये औऱ बाद में राजस्थान में कांग्रेस के अध्यक्ष बनाये गये।

सारा पायलट को दिल्ली में सबसे ड़ाउन टू अर्थ सेलेब्रिटी वाइफ माना जाता है। उनके करीबी दोस्त मुसीबत के समय उनसे सलाह लेना पंसद करते है। ऐसे में सारा ने अपने बारे में जो भी फैसला किया होगा उसे एक मैच्योर डिसीजन माना जा सकता है। पर यह भी फैक्ट है कि सचिन और सारा की कहानी का सच उन दोनों के सिवा कोई नही जानता। ऐसे में गौरव प्रधान जैसे लोगों द्वारा ट्वीटर पर आरोप लगाना बेमानी और राजनीति से प्रेरित माना जा सकता है।

कांग्रेस में एम चैन्नारेड़्ड़ी से लेकर नारायण दत्त तिवारी के किस्सों की भरमार रही है। ऐसे में सचिन पायलट के लिए फैलायी गयी रंगीन कहानी, उनकी तरह ही बेरंग औऱ मोनोटोनस् है। खैर, वैसे भी हमारा फोकस सचिन पायलट की राजनीति, उनका विजन औऱ उनके लोकहित के काम होने चाहिए, उनकी पर्सनल लाइफ नही। राहुल गांधी को राजस्थान में उनसे बहुत उम्मीद है पर उम्मीद का नाजुक शीशा चकनाचुर हो सकता है अगर ट्वीट की जगह नौकरानी का बयान आ जायें। और वो होने तक, कहानी की सच्चाई पर विश्वास करना मुश्किल है।

 

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