You are here
Home > Rajasthan > Politics > ओम माथुर फिर से वसुंधरा राजे की कुंड़ली के राहू साबित हुए !!

ओम माथुर फिर से वसुंधरा राजे की कुंड़ली के राहू साबित हुए !!

वसुंधरा राजे की कुंड़ली में ऐसा कोई योग नही जो उन्हे अनंत-विजय की ओऱ ले जाता है। पर, शनि की तगड़ी कृपा से उन्हे राजयोग की प्राप्ति हुई और बार बार उन्हे अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त हुई है। यज्ञ सिद्धी पर विश्वास रखने वाली वसुंधरा राजे ने, पीताम्बरा पीठ की बगुला मुखी से लेकर बांसवाड़ा की त्रिपुर सुंदरी तक सबको साधा पर उनकी राजनीतिक कुंड़ली में बैठे एक राहू के कारण उनके राज-योग सूर्य अब अस्ताचल की ओऱ है। वो राहू है – ओम माथुर।

सूत्रों की माने तो ओम माथुर ने करीब पंद्रह टिकट का ठेका विधानसभा चुनावों में लिया और केवल एक सीट – सुमेरपुर को छोड़ कर उनके सभी उम्मीदवार चुनाव हार सकते है। सुमेरपुर में राहुल गांधी की प्रत्याशी रंजू रामावत चुनाव मैदान में है और उनकी राजनीति राहुल गांधी की जेब में वापस उसी तरह चली जायेगी, जैसे कि पर्ची पर उनका नाम जेब से निकल आया था। वैसे राहुल गांधी के कुर्ते की जेब फटी रहती है तो रंजू रामावत जेब से किधर गिरेगीं, ये अभी नही कहा जा सकता।

ब्यावर, जैतारण, सुमेरपुर, आहोर, जालोर, भीनमाल, सांचोर, रानीवाड़ा, सिरोही, पिंड़वाड़ा औऱ रेवदर वे सीटे है जहां ओम माथुर का सीधा दखल था। भाजपा लगातार पच्चीस सालों से ब्यावर जीत रही है पर निवर्तमान विधायक शंकर सिंह की भारी खिलाफत के बावजूद ओम माथुर ने उनके टिकट की वकालत की। वसुंधरा राजे, ब्यावर में पूर्व सांसद रासा सिंह रावत के बेटे तिलक सिंह को टिकट देने के पक्ष में थी पर ओम माथुर के दबाव में उन्होने शंकर सिंह के नाम पर हामी भर दी। जैतारण की सीट एक दूसरा उदाहरण है जहां ओम माथुर की व्यक्तिगत दुश्मनी की वजह से भाजपा सीट गंवा रही है। यहां जलदाय मंत्री सुरेन्द्र गोयल निर्दलीय हो कर चुनाव लड़ रहे है।

विवादों औऱ साजिशों से ओम माथुर का पुराना नाता रहा है। पावली बलात्कार कांड़ के बारे में अभी भी पाली जिले में कई बार सवाल उठाये जाते है। एक जमाना था जब भैरों सिंह शेखावत के जमाने में ओम माथुर को जयपुर के भारती भवन रात के अंधेरे में धक्के दे कर निकाला गया था। इसके बाद ओम माथुर ने गुजरात में शरण ली। संजय भाई जोशी सीडी कांड़ में भी कई बार उनकी भूमिका पर सवाल किया जाता है। फिर भी, वे धीरे धीरे नरेन्द्र मोदी के करीबी बन गये औऱ आज की तारीख में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह किसी से खौफ खाते है तो वो है ओम माथुर की साजिशे।

राजस्थान के चुनावों में इस बार ओम माथुर ने बड़ी चतुराई से वसुंधरा राजे से समझोता कर लिया औऱ गोड़वाड़ की लगभग सारी सीटों पर अपने समर्थकों को टिकट दिलवाया। केवल पाली जिले की सीटों को छोड़ कर ओम माथुर के सभी उम्मीदवार जीतने की स्थिती में नही है। वसुंधरा राजे के करीबी अर्जुन सिंह देवड़ा की बगावत भी ओम माथुर के प्रभाव का नतीजा थी। 2008 के चुनावों में भी ओम माथुर की भूमिका पर सवाल उठाये गये थे क्योकि उनके सारे उम्मीदवार गोड़वाड़ में हार गये थे। अपने दम पर 86 सीट ले कर आने के बावजूद वसुंधरा राजे को प्रतिपक्ष का नेता बनना पड़ा।

ओम माथुर, एक बार फिर से वसुंधरा राजे की राजनीतिक कुंड़ली में राहू साबित हुए है। अब देखना ये कि वसुंधरा राजे इस राहू का किस तरह निवारण करेगीं।       

 

Leave a Reply

Top