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दूधारु गायों को “खटाणां” जानते है सचिन पायलट

गिणे न कोई गरीब नै, धनपत नै सै धाय..।

छींक खाय जो धनपति, खम्मा खम्मा कहवाय..।।

राजस्थान में चुनावी बहार के बीच कांग्रेस के नेता अब सरकारी दूधारु गाय को दूहने को बेकरार नजर आ रहे है। पर उससे पहले, सरकार का दूध पीने की आस में लगे कई नेता अच्छे से दुहे जा रहे है। उनकी दुनिया उम्मीद पर कायम है पर कांग्रेस मे दूधिये सब तरफ काम पर लगे है। वैसे भी कांग्रेस अपने आपको किसानों की पार्टी कहलाना पंसद करती है और पशुपालन के बिना किसानी अधूरी है।

बात शुरु हो तो घर के बाड़े से। अजमेर में कांग्रेस के पुराने संकट मोचक विष्णु मोदी को तीन सीटों पर चुनाव प्रंबधन का जिम्मा दिया गया है। मोदी काफी लंबे अरसे से राजनितिक काल कोठरी में अपने मौके का इंतजार कर रहे थे। सूत्रों की माने तो मोदी को किशनगढ, ब्यावर और मसूदा की जिम्मेदारी दी गयी है। अगर भाजपा ब्यावर विधायक शंकर सिंह का टिकिट काट कर किसी नये चेहरे को मौका देती है तो विष्णु मोदी किशनगढ से चुनाव लड़ सकते है। भाजपा के टिकिट नही बदलने की स्थिती में मोदी गुट ब्यावर को सुरक्षित सीट मान रहा है। ए ग्रेड़ सीट होने के बावजूद वहां भाजपा विधायक का भारी विरोध है और पार्टी ब्यावर में रासासिंह रावत के बेटे तिलक सिंह पर दांव खेल सकती है।

देख्या खेल खुदाय का, किसा रचाया रंग..।

खां-जादा खेती करै, तेली चढै तुंरग..।।

 

ऩागौर में ड़ीडवाना से रामकरण पायली और लाड़नूं से रवि पटेल काफी कसरत कर रहे है। परबतसर की रैली को सफल बनाने में लच्छाराम बराडडा और मुकेश भाकर ने भी काफी जोर लगाया। भाकर और पटेल दोनों ही लाडनूं से भाग्य आजमाना चाहते है वही लच्छाराम परबतसर में लस्सी ढूंढ रहे है। भाजपा में अपना भाग्य आजमाने के बाद सहदेव चौधरी अब फिर से कांग्रेस में है और चैनल के साथ साथ बैक चैनल के जरिये भी सफल होने की कवायद कर रहे है। गहलोत के जमाने में सहदेव चौधरी की राबड़ी कभी खार नही खा पायी। उन्हे उम्मीद है कि सचिन पायलट उनको छाछ जरुर देगें। वैसे गांधी चौक के कलांकद को भी कई खाने को तैयार है पर जी ललचाने के साथ दातार होना भी जरुरी है।

पाली से केवलचंद गुल्लेछा, लोहावट के करण सिंह उचियारदा, बाड़मेर से आजाद सिंह राठौड़, नीम का थाना से रमेश मोदी, अंतरिक्ष मोदी, चुरु से रफीक मंड़ेलिया, किशनपोल से अमीन कागजी कांग्रेस की वो दूधारु गायें है जो बहने को तैयार बैठी है। पर, राजनीति के सयाने जानते है कि काची बछड़ी का दूध जल्दी फट जाता है। इसलिए, पुरानी भैसों के आसरे ही सचिन पायलट सत्ता का दही जमाने की कोशिश कर रहे है।

इस्क, खुस्क, मासुक, मसक, खैर, खून, मद-पान..।

इता छिपाया ना छिपै, परगट होय निदान..।।

सीकर में सुभाष महरिया, बारां-झालावाड़ में प्रमोद जैन भाया, बांसवाड़ा में महेन्द्रजीत मालवीय, चित्तोगढ में उदयलाल आंजना, बड़ी सादड़ी में प्रकाश चौधरी, भीम में लक्ष्मण सिंह रावत, मावली में पुष्कर ड़ांगी, जैतारण में दिलीप चौधरी, अजमेर में हेमंत भाटी, बगरु में अशोक तंवर, बाड़ी में गिरिराज मलिंगा, कामां में जाहिदा वे पुराने खिलाड़ी है जो सचिन पायलट की राब घोटने में लगे है।

वैसे, सयाने जानते है कि ड़यूक प्योर मिल्क की सप्लाई ड़ी एन लोजिस्टिक के जरिये की जाती है जिससे कारमिक प्रोजेक्ट बनाये जाते है। बाड़ों की रखवाली का जिम्मा शुक्ला जी पर है जो भैंस ब्याहने में तो एक्सपर्ट है पर खुद के ब्याव में नही पहुंच पाये थे। मारवाड़ में कहावत पुरानी है..

गरज दीवाणी गूजरी, अब आयी घर कूद..।

सावण छाछ ना घालती, जैठ परुसै दूध..।।

 

 

 

 

 

 

 

 

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