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पहली फील्ड पोस्टिंग में ही गुल खिला रहे है एसपी मनीष अग्रवाल

बाड़मेर एसपी मनीष अग्रवाल की दाढी मूंछ के बाल भी भले ही पूरे नही आये हो पर पुलिसिया रौब की कीड़ा उनमें घर कर गया है। 1983 मे उत्तर प्रदेश में जन्मे मनीष अग्रवाल की बाड़मेर में एसपी की रुप में पहली फील्ड़ पोस्टिंग है। गंगा किनारे वाले भय़्यन को अभी यह पता नही चल पाया है कि मारवाड़ में पानी गहरा बहता है। वैसे रात के अंधेरे में ज्यादा मत निकला करो, हमारी नजर है आप पर।  

प्रेमदान देथा, जो कि राजस्थान के एक प्रादेशिक न्यूज चैनल के एक जिला पत्रकार है, चाय की थड़ी पर दोस्तों के साथ शुक्रवार को गपशप कर रहे थे। चार लोग आये, उन्हे उठा कर एक प्राइवेट गाड़ी में पटका और अपहरण कर ले गये। प्रेमदान के दोस्तों और परिजनों को बाद में पता चला कि वे चार लोग जिला स्पेशल सैल के पुलिस वाले थे और प्रेमदान तो बाड़मेर के सदर थाने ले गये है।

सभी जानते है कि ड़ीएसबी ब्रांच सीधे सीधे जिला एसपी की टीम होती है और सीधे रिपोर्ट करती है। ऐसे में अपहरणकर्ताओं के साथ साथ बाड़मेर के जिला एसपी मनीष अग्रवाल भी दिन दहाड़े हुए इस अपहरण की वारदात में साजिशकर्ता और सूत्रधार के रुप में शामिल है।

प्रेमदान देथा को दोष ये कि उन्होने अपने चैनल पर राजस्थान लोक सेवा आयोग के शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने की सूचना सबसे पहले दी। इस मामले में एक मुकदमा बाड़मेर सदर थाने में दर्ज हुआ और थानाधिकारी का कहना है कि प्रेमदान को बयान दर्ज करने के लिए नोटिस दिया गया था।

जो कानून नही भी जानते उन्हे पता है कि बाड़मेर ना तो पाकिस्तान में है या ही उत्तर प्रदेश में। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को गुंड़ो की तरह उठा ले जाना एक अपराध है। वही, पुलिस को पत्रकार से उसके सूत्र के बारे में पूछने का अधिकार एसपी साहब ने किसी आईपीसी में पढ़ा है ये रिसर्च का विषय है।

वैसे, सरकार बाद में जागी औऱ प्रेमदान को देर शाम छोड़ दिया गया। पर, एक नये मुर्गे की इस तरह की हरकत पर पुलिस विभाग को शर्म जरुर आनी चाहिए। जोधपुर रेन्ज आईजी की जिम्मेदारी है कि मनीष अग्रवाल और उसके चार पुलिस वालों के खिलाफ प्रेमदान देथा के अपहरण का मुकदमा दर्ज करे और अग्रवाल के खिलाफ 120 बी की धारा अलग से लगा कर मामले की जांच करे। अगर नही की गई तो अगली बार पुलिस वाले कानूनी धरपकड़ में भी लोगो द्वारा पीटे जाये तो गम ना करे।

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