You are here
Home > Rajasthan > Politics > सचिन पायलट ने अपनी राजनीतिक आबरु लगायी दांव पर

सचिन पायलट ने अपनी राजनीतिक आबरु लगायी दांव पर

“फटा पोस्टर निकला हीरो” की तर्ज पर आखिरकार राजस्थान में कांग्रेस के प्रत्याशियों की लिस्ट जारी हो ही गयी। चुनावी प्रक्रिया शुरु होने के चार दिन तक दिग्गजों के भंयकर घमासान की खबरों के बीच लिस्ट आयी तो पर निकली – फुस्स। कांग्रेस के दिग्गजों ने जिस तरह से एक दूसरे की फजिती की उसके हिसाब से कलम कसाईयों को काफी मसाले की उम्मीद थी। कांग्रेस की लिस्ट में जनता ही अब स्वादानुसार नमक ड़ाल कर काम चलायेगी।

सचिन पायलट का ना लड़ूंगा ना लड़ने दूंगा कैपेंन आखिरकार फैल हो गया। सचिन पायलट ने अपने लिए सुरक्षित सीट मुस्लिम बाहुल्य टोंक को चुना, जहां उनके करीबी जीआर खटाना पहले से ही उनके लिए पाल बांधने का काम कर रहे थे। खास बात ये कि टोंक विधानसभा क्षेत्र में तीस हजार गुर्जर भी है जो अभी तक विधायकी से दूर ही थे। भाजपा ने अपने संगठन की राय के विरुद्ध अजीत मेहता को वापस मैदान में उतार कर सचिन पायलट की राह पहले से ही आसान कर दी थी।

सचिन पायलट तो पार पा जायेगें, पर उनकी कुशल राजनेता के रुप में उनकी प्रतिष्ठा अपनी आबरु शायद ही बचा पाये। अजमेर जिले के टिकिट पायलट की मर्जी पर बांटे गये है। पायलट खेमे के महेन्द्र ऱलावता को अजमेर उत्तर से, सेवा दल के प्रदेशाध्यक्ष राकेश पारीक को मसूदा और पारस पंच को रावत बाहुल्य ब्यावर से मैदान में उतारा गया है। वही किशनगढ़ के लिए अभी लड़ाई जारी है जहां जाट बाहुल्य सीट पर पायलट एक बनिय़ा प्रत्याशी के लिए जी जान लगा रहे है। अजमेर में पायलट को नसीम अख्तर के नाम पर आखिरकार समझोता करना पड़ा वही रामनारायण गुर्जर की साफ छवी उनके लिए तुरुप का पत्ता साबित हुई। नसीम अख्तर इंसाफ, रामनारायण गुर्जर और रघु शर्मा की सीट को ही अजमेर में हाल फिलहाल सुरक्षित माना जा सकता है। ब्यावर में कांग्रेस का मुकाबला निर्दलीय देवेन्द्र सिंह से होने की संभावना है।

केकड़ी से सांसद रघु शर्मा को मौका मिला है जो कुछ समय पहले तक पायलट कैम्प में थे पर कांग्रेस की राजनीति में उन्हे तंबू-तोड़ हाथी कहा जाता है।

अजमेर समेत 152 की पूरी लिस्ट में केवल 14 ही ऐसे टिकट है जो कि ब्रांड़ सचिन पायलट के माने जा रहे है। रायसिंह नगर से सोना देवी बावरी को उन्होने जमींदारा पार्टी से तोड़कर टिकट दिया। मनीष यादव को शाहपुरा से टिकट दे उन्होने गुजरात की पूर्व राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री रही कमला बेनीवाल की राजनीति का ढक्कन हमेशा के लिए बंद कर दिया। हालांकि आलोक बेनीवाल जाट-प्राईड़ के मुद्दे को लेकर निर्दलीय़ मैदान में उतर सकते है पर फायदा दोनो तरफ ही भाजपा के राव राजेन्द्र सिंह है।

जयपुर की विद्याधर नगर सीट पर सचिन पायलेट समर्थक सीताराम अग्रवाल को टिकट मिलना इस बात का प्रमाण है कि अगर मैने एक बार वादा कर दिया तो फिर में खुद की भी नही सुनता। प्रतापसिंह खाचरियावास ने खेमा तो बदला पर अब वो धर्म संकट में है क्योकि उनके राजनीतिक गुरु सीपी जोशी फिर से मैदान में आ गये है। नदबई से हिमांशु कटारा अपनी ड़ाक्टरी छोड़ कर मैदान मे कूद पड़े है पर स्थानीय कांग्रेसी ये नही समझ पा रहे कि कटारा की कटार उन पर गिरी कहा से। बांदीकुई से जीआर खटाना का टिकिट तो वैसा ही जैसा सचिन पायलट को दूसरा टिकट मिला हो। इनके अलावा दानिश अबरार और प्रशांत बैरवा एक बार फिर से सचिन पायलट के सहारे टेक ऑफ की कोशिश करेगें। अंता में प्रमोद जैन भाया वैसे तो खुद ही अपने दम पर लड़ते है पर उन्हे भी पायलट का झंड़ाबरदार माना जाता है।

पायलट खेमे से भीम से लक्ष्मण सिंह रावत य़ा उसके बेटे का नाम आना अभी बाकी है।

ऐसे में केवल एक दर्जन की फौज के साथ पायलट ने अपनी फ्लाईट क्रू बड़ी ही लीन रखी है और सात तारीख की फ्लाईट अभी तक सही समय पर उडने को तैयार बतायी जा रही है।       

Leave a Reply

Top