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हनुमान बेनीवाल – वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।।

वणज करैला वाणियां, और करैला रीस..।

वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।।

कहावत पुरानी है पर नागौर के हडुमान बेनीवाल पर सटीक बैठती है। राजनीति का धंधा करने में नाम तो कमाया पर जब फायदे नुकसान की बात आयी, तो गांठ का माल खो दिया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के बैनर तले बोतल खोल कर बैठे बेनीवाल ने मारवाड में कई दिग्गजों का पिछले कई वर्षो से पानी उतार ऱखा था। जाटों की राजनीति कर रहे, हडुमान की उड़ान आज नही तो कल खत्म तो होनी ही थी पर ये 2019 के चुनाव का दौर उस आखिरी छटपटाहट का दौर है, जहां वे संघर्ष के बिना मैदान नही छोडना चाहते।

समय खराब हो तो व्यक्ति अजगर से कसरत करने की गलती कर ही बैठता है। ऐसा ही गलती कर बैठे हडुमान बेनीवाल। पहले उन्होने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सोदेबाजी की कोशिश की। सूत्रो के मुताबिक हडुमान बेनीवाल ने नागौर की सीट मांगी औऱ उसके बदले में मारवाड़ की सभी सीटो पर समर्थन का वादा किया। बेनीवाल ने अपनी बोतल, कांग्रेस के हाथ में देने से साफ इंकार कर दिया। नतीजा ये कि अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत अब जोधपुर शहर के बाहर निकलते ही लू के थपेडे महसूस कर रहे है। जाट औऱ विश्नोई, दोनों को मारवाड़ में भंवरी देवी कांड की याद बार बार आ रही है और जिन्हे नही आ रही, उन्हे याद दिलाया जा रहा है। ऐसे में हडुमान की सौदेबाजी के कारण गहलोत की जान सांसत में है। अगर वैभव गहलोत जोधपुर सीट से हारे तो इसका ठीकरा बेनीवाल के माथे पर ही फूटेगा।

 

जाट ना मानै गुण करयों, चिणों न माने बाय…।

ऊंड़ो खोद अर् गाड़दे, आं की औखद आय..।।

अशोक गहलोत शायद इस कहावत में विश्वास तो करते थे। पर पुत्र मोह ने इस बार उनके हाथ बांधे हुए है। लोकसभा चुनाव के बाद ना तो पुत्र मोह आडे आयेगा और ना ही कोई अन्य राजनीतिक मजबूरी। ऐसे में हडुमान के अनुमान से ज्यादा, उन पर ओले गिरने की संभावना नजर आती है।

गोद लड़ायों गीगलो, चढ्यो कचैरी जाट….।

पीहर लड़ायी मदमणी, तीनूं बाराबाट..।।

गहलोत से बात नही बनी तो बेनीवाल ने भाजपा का रुख किया। संघ के कुछ ज्ञानी भाई साहबों का मानना है कि बेनीवाल उन्हे राजस्थान ही नही, हरिय़ाणा में भी वोट दिला सकते है। ऐसे में कभी कैलाश चौधरी औऱ कभी सोनाराम चौधरी का नाम बाडमेर सीट से आगे बढाया जा रहे है, जो बेनीवाल की बोतल का पानी पी कर चुनाव में पार पा सके। बदले में हडुमान को चाहिए – नागौर। खास बात ये कि भाजपा का हडुमान बेनीवाल के साथ कोई भी पैक्ट होने का सीधा असर जोधपुर पर होगा और वैभव गहलोत की हार चुनाव मंडने से पहले ही सुनिश्चित हो जाएगी।

अंग मे राखै आंट, करमां री पासी कनै…।

जटा बन्धायां जाट, सिद्ध हुवै न मोतिया..।।

बेनीवाल ने नागौर से मिर्धा ब्रांड को खत्म करने के लिए चोटी बांध रखी है। रिछपाल मिर्धा और हरेन्द्र मिर्धा को वैसे में हडुमान गिन नही रहे है। खासबात ये, कि दोनो के राजनीति का वैसे भी जैक पर चढी गाडी की तरह है, पर राजनीति का कीड़ा बार बार कुलबुलाता है औऱ कुचले जाने तक हरकते करने की तडप के साथ जी रहा है। वैसे, रिछपाल मिर्धा ने अपने बेटे को डेगाना का विधायक बनवा दिया है वही हरेन्द्र मिर्धा के बेटे राघवेन्द्र मिर्धा अपनी लकीर को अपने पिता से बड़ी करने में विश्वास नही करते। उनके शुभचिंतकों को उस समय का इंतजार है जब पिताजी को अक्कल आयेंगी औऱ रिटायर हो जायेंगें। वैसे, बेनीवाल का असली टारगेट है – ज्योति मिर्धा।

सूहव सीस गुथांय कर, गइ गांव री हाट…।

विणज गमायो वाणियों, बळद गमाया जाट..।।

हालांकि ये कहावत ज्योति मिर्धा पर ठीक नही बैठती। यहां वे सुहस नही बल्कि नागौर की बेटी है औऱ बाबा नाथूराम मिर्धा की पोती है। सांसद के रुप में ज्योति मिर्धा ने नागौर में जो काम किये, उनके बाद राजस्थान के कई दिग्गज उन्हे अपना कंपीटिशन मानते है। हालांकि ज्योति मिर्धा को नागौर औऱ दिल्ली का रास्ता ज्यादा पंसद है औऱ सूत्रो का कहना है कि वे जयपुर दिल्ली हाईवे को ज्यादा पंसद नही करती। फिर भी, पहला मौका मिलते है अशोक गहलोत ने ज्योति मिर्धा का टिकट काटने की तैयारी लगभग कर ही ली थी।

हडुमान बेनीवाल औऱ जाटों के दो विभीषण – रिछपाल औऱ हरेन्द्र मिर्धा इस बार अपनी राजनीति की आखिरी बड़ी पारी देख रहे है। ऐसे में जाटों को अगर हडुमान बेनीवाल की राजनीति को जिन्दा रखना है तो उसे अशोक गहलोत के प्रकोप से बचाना बहुत जरुरी है। और जाट राजनीति की बाजरे की फसल तभी बचाई जा सकती है जब हनुमान बेनीवाल बड़ी समझदारी से हाथियों की इस लड़ाई को किनारे पर खडे हो देखे और अपनी बारी का इंतजार करे।

बेनीवाल के करीबी लोग बताते है कि उन्हे हार से बहुत ड़र लगता है। तो फिर जाटों की राजनीति में गौण हो जाने की आंशका भी उनके मन को भंयकर रुप से भयभीत कर सकती है। इसलिए बेनीवाल को जो भी फैसला करना है, वो बड़ी समझदारी से करना होगा।

वो कहते है ना – जान है तो जहान है।  

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