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उपचुनाव के नतीजों ने दिए जाट राजनीति की बदलती हुई हवा के संकेत।

वणज करैला वाणियां, और करैला रीस..। वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।। हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई नारायण की नैया किसी तरह से पार लगाने में सफलता तो पायी, पर खींवसर के उपचुनावों में बेनीवाल की पोल भी खुल कर सामने आ गयी। अगर बोगस वोटिंग नही तो

नागौर को चुनना है: बेनीवाल-ब्रांड़ संघर्ष या बाबा की पोती ज्योति मिर्धा ।।

पावणा ने फलका खुवाना है, इंतजार करे। ज्योति मेरी बहन है, पर मायरा एक ही भरा जाता है। ज्यादा बेटी पीहर में अच्छी नही लगती। ये कहना है हनुमान बेनीवाल का। नागौर के युवाओं के प्रतिनिधि होने का वे दावा करते है पर उनकी सोच अभी तक दकियानूसी ही है। जाट

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