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सतीश पूनियां की ताजपोशी ऱाजस्थान में वसुंधरा युग के अंत की शुरुआत है।

तीन महीनों के इंतजार के बाद राजस्थान में भाजपा के नये अध्यक्ष की घोषणा हो गई। सतीश पूनियां को राजस्थान में भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। चार चुनाव हारने के बाद आखिरकार 2018 में आमेर जैसी कठिन सीट से चुनाव जीत कर विधायक बने सतीश पूनियां के लिए संघर्ष

अशोक गहलोत की अग्नि परीक्षा होगी आने वाली सर्दियां।।

राजनीति में कुछ लोग वक्त के साथ कुछ लोग बदल नही पाते पर फिर बाद में उन्हे पता चलता है कि वक्त बदल चुका है। ऐसे ही एक शख्स है, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और आने वाली सर्दिया उनके लिए राजनीतिक शीतकाल की शुरुआत साबित हो सकती है। गहलोत को

नागौर को चुनना है: बेनीवाल-ब्रांड़ संघर्ष या बाबा की पोती ज्योति मिर्धा ।।

पावणा ने फलका खुवाना है, इंतजार करे। ज्योति मेरी बहन है, पर मायरा एक ही भरा जाता है। ज्यादा बेटी पीहर में अच्छी नही लगती। ये कहना है हनुमान बेनीवाल का। नागौर के युवाओं के प्रतिनिधि होने का वे दावा करते है पर उनकी सोच अभी तक दकियानूसी ही है। जाट

राजेन्द्र राठौड – राजनीति के जोकर के बदलते रंग

राजनीति की ताश में जोकर का रंग जरुर बदल सकता है पर उसकी औकात भी बदल जाए, ये जरुरी नही। ताश के खेल – पोकर, में जोकर का इस्तेमाल तिकड़ी बनाने के लिए तो किया जाता है पर जोकर कभी तुरुप नही होता। राजस्थान की राजनीति में राजेन्द्र राठौड का

ज्योति या हडुमान – नागौर का जाट धर्म संकट में

मारवाड़ ने नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा और रामरघुनाथ चौधरी जैसे दिग्गज नेता देखे है, पर जाट राजनीति में ऐसा संकट कभी नही आया। इस बार नागौर के जाट को अपना राजनीतिक भविष्य तय करना है। नागौर का जाट ये तय़ करेगा कि वो हनुमान बेनीवाल के संघर्ष के

ओम माथुर फिर से वसुंधरा राजे की कुंड़ली के राहू साबित हुए !!

वसुंधरा राजे की कुंड़ली में ऐसा कोई योग नही जो उन्हे अनंत-विजय की ओऱ ले जाता है। पर, शनि की तगड़ी कृपा से उन्हे राजयोग की प्राप्ति हुई और बार बार उन्हे अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त हुई है। यज्ञ सिद्धी पर विश्वास रखने वाली वसुंधरा राजे ने, पीताम्बरा पीठ

क्या जल जायेगी राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की लंका !!

“लूम लपेटी लंक को जारा, लाह समान लंक जरी गयी।“ लंका तो पूरी तरह से जल जाने के करीब है – पर ये लंका है हडूमान की। पांच साल तक उछल कूद मचाने के बात राजस्थान में तीसरे मोर्चे की बात करने वाले हनुमान बेनीवाल केवल 67 विधानसभा सीटों पर ही

मानवेन्द्र सिंहः राजनीति के लिक्विड़ ऑक्सीजन में

पहले वे आपसे असहमत होते है, फिर विरोध करते है, फिर वे आपकी हत्या करते है औऱ बाद में आपको पूजने लगते है। ये है किसी भी व्यक्ति के महान से महात्मा बनने की सीढीयां। पर महानता की ओऱ अग्रसर किसी व्यक्ति को अगर लिक्विड़ ऑक्सीजन में ड़ाल दिया जाये

नाते की औरत सा व्यवहार हो रहा है मानवेन्द्र सिंह से

राजस्थान में नाता प्रथा को एक कुरीति माना जाता है। कुरीति होने के बावजूद सामाजिक स्तर पर कई जातियां नाता प्रथा को आज भी स्वीकार करती है और कई जातियों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। वैसे भी सामाजिक पंरपराओं की शुरुआत किसी समस्या के हल के लिए होती

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