You are here
Home > Posts tagged "Jyoti Mirdha"

नागौर को चुनना है: बेनीवाल-ब्रांड़ संघर्ष या बाबा की पोती ज्योति मिर्धा ।।

पावणा ने फलका खुवाना है, इंतजार करे। ज्योति मेरी बहन है, पर मायरा एक ही भरा जाता है। ज्यादा बेटी पीहर में अच्छी नही लगती। ये कहना है हनुमान बेनीवाल का। नागौर के युवाओं के प्रतिनिधि होने का वे दावा करते है पर उनकी सोच अभी तक दकियानूसी ही है। जाट

मारवाड़ में मोदी लहर बनी मृगमरिचिका

मारवाड़ के लू के थपेड़ो औऱ  राजनीति के गहरे बहते पानी के बीच मोदी लहर ठंडी सी पड गयी है। मारवाड़ की पांच लोकसभा सीटों में से तीन पर मोदी लहर का असर केवल मृगमरिचिका बन चुका है। यानि दिखाई तो दे रहा है पर वास्तविकता में है नही। मारवाड़

राजेन्द्र राठौड – राजनीति के जोकर के बदलते रंग

राजनीति की ताश में जोकर का रंग जरुर बदल सकता है पर उसकी औकात भी बदल जाए, ये जरुरी नही। ताश के खेल – पोकर, में जोकर का इस्तेमाल तिकड़ी बनाने के लिए तो किया जाता है पर जोकर कभी तुरुप नही होता। राजस्थान की राजनीति में राजेन्द्र राठौड का

ज्यादा जहरीले सांप को पहले मारेगा नागौर का राजपूत

रेसम री ड़ोरी करै, नित-प्रति लावै धोय...। खूंटै बन्धै हेम रै, गधो तुंरग ना होय...।। बात तो पते की है पर अमित शाह ने मारवाड की सयानी बाते शायद कभी सुनी नही होगी। यही कारण है कि हनुमान बेनीवाल औऱ अमित शाह की सौदेबाजी ने मारवाड़ में चुनाव का रंग बदल

ज्योति या हडुमान – नागौर का जाट धर्म संकट में

मारवाड़ ने नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा और रामरघुनाथ चौधरी जैसे दिग्गज नेता देखे है, पर जाट राजनीति में ऐसा संकट कभी नही आया। इस बार नागौर के जाट को अपना राजनीतिक भविष्य तय करना है। नागौर का जाट ये तय़ करेगा कि वो हनुमान बेनीवाल के संघर्ष के

राजस्थान में राजपूत स्वाभिमान की लडाई नागौर पहुंची

ना कोई लीड़र है और ना ही कोई बैनर, पर राजपूतो के स्वाभिमान की असली लड़ाई अब राजस्थान की सत्ता के केन्द्र – नागौर में लड़ी जाय़ेगी। इतिहास गवाह है कि मारवाड का राज भले ही जोधपुर से चलता हो पर जब भी युद्ध का ढोल गांवों में बजाया जाता

2018 का चुनाव राजस्थान की जाट राजनीति को नयी दिशा देगा !!

राजस्थान में जाट राजनीति सबसे बड़ा फेक्टर है। वसुंधरा राजे ने पांच साल तक अपना तख्त जाटों के भरोसे ही बचाये रखा नही तो 2015 में उनकी ऱवानगी होना लगभग तय हो चुका थी। मोदी भी राजस्थान के जाटों से खौफ खाता है और यही कारण है कि वसुंधरा राजे

ज्योति मिर्धा – विरासत की सीढ़ी से महत्वकांक्षा के भार की कहानी

खग वाहूं उलझै घणी, मैंगल रहिया घूम। नणदल, ऊंची बांध दो, बाजूबंद री लूंम।। राजनीति किसी युद्ध से कम नही और राजनीति के मैदान में जब योद्धा महिला हो तो देखने वालों की नजरे और नजरियां दोनों ही अलग तरह का होता है। राजस्थान की राजनीति में गायत्री देवी के जमाने से ही महिलाओं

हनुमान बेनीवाल – डूबती भाजपा के लिए फायदे का सौदा

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जमूरे औऱ जोकर पालने का शौक है। भोकनें वाले कुत्तों को वो गोली मार दिया करती है। हनुमान बेनीवाल उनके हाथों का जमूरा है या नही यह सीधे सीधे कहना मुश्किल है पर  भाजपा और संघ से  बेनीवाल की करीबी कई बार  उन पर

Top