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उपचुनाव के नतीजों ने दिए जाट राजनीति की बदलती हुई हवा के संकेत।

वणज करैला वाणियां, और करैला रीस..। वणज किया था जाट नै, सो का रह गया तीस..।। हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई नारायण की नैया किसी तरह से पार लगाने में सफलता तो पायी, पर खींवसर के उपचुनावों में बेनीवाल की पोल भी खुल कर सामने आ गयी। अगर बोगस वोटिंग नही तो

मोदी लहर से राजस्थान के कई राजनीतिक सितारे गर्दिश में

2014 के चुनावों ने भारत की राजनीति को बदल कर रख दिया। पर 2019 के चुनाव उससे भी महत्वपूर्ण है क्योकि ये चुनाव राजनीति की दिशा को बदल देगें। मोदी लहर की शुरुआत राजस्थान में दिसम्बर 2013 के विधानसभा चुनावों के साथ हुई पर राजस्थान के लिए 2014 से 2019

समाजवाद की लहरों पर हिचकोले खाती अशोक गहलोत की तीसरी पारी !!

किसानो का पूरा कर्जा माफ कर दिया गया। बेरोजगारो को हर महीने 3000 रुपये भत्ता दिया मिलेगा। वृद्ध और विधवा पेन्शन य़ोजना में बढोतरी होगी। रोजगार गांरटी स्कीम महानरेगा और मुफ्त दवा योजना को फिर से पुनर्जागृत किया जायेगा। सरकारी कर्मचारियों की पेन्शन ड़ायरी से 20000 तक की दवाईयां मिल

जनता का मुख्यमंत्री बनाम “क्यूट” उप-मुख्यमंत्री में बदली राजस्थान की लड़ाई

“कितना क्यूट है वो, सीएम तो बनना ही चाहिए” चुनावी समर के दौरान राजस्थान में दिल्ली के कई दिग्गज पत्रकार मधुमक्खी की तरह भिनभिनाते नजर आये। उनमें से ज्यादातर, विशेषकर महिला पत्रकारो में, जिज्ञासा ये थी कि क्या सचिन पायलेट राजस्थान के मुख्यमंत्री होगे या नही। इस क्यूटनेस का जादू प्रियंका

2018 का चुनाव राजस्थान की जाट राजनीति को नयी दिशा देगा !!

राजस्थान में जाट राजनीति सबसे बड़ा फेक्टर है। वसुंधरा राजे ने पांच साल तक अपना तख्त जाटों के भरोसे ही बचाये रखा नही तो 2015 में उनकी ऱवानगी होना लगभग तय हो चुका थी। मोदी भी राजस्थान के जाटों से खौफ खाता है और यही कारण है कि वसुंधरा राजे

चुनावी नांव में हिचकोले खा रहे है राजस्थान की जनता के मुद्दे

नागौर में खरनाल के अलावा अगर कही वसुंधरा राजे जाट राणी होने के खटके दिखाने में विश्वास रखती है तो वो जगह है  - ओसियां। भोपालगढ़ के रिजर्व हो जाने के बाद मारवाड़ की जाट राजनीति का केन्द्र ओसियां है। आधे से ज्यादा खाली मैदान और ड़ूबते राजनीतिक सितारे का

क्या जल जायेगी राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की लंका !!

“लूम लपेटी लंक को जारा, लाह समान लंक जरी गयी।“ लंका तो पूरी तरह से जल जाने के करीब है – पर ये लंका है हडूमान की। पांच साल तक उछल कूद मचाने के बात राजस्थान में तीसरे मोर्चे की बात करने वाले हनुमान बेनीवाल केवल 67 विधानसभा सीटों पर ही

मानवेन्द्र सिंहः राजनीति के लिक्विड़ ऑक्सीजन में

पहले वे आपसे असहमत होते है, फिर विरोध करते है, फिर वे आपकी हत्या करते है औऱ बाद में आपको पूजने लगते है। ये है किसी भी व्यक्ति के महान से महात्मा बनने की सीढीयां। पर महानता की ओऱ अग्रसर किसी व्यक्ति को अगर लिक्विड़ ऑक्सीजन में ड़ाल दिया जाये

मानवेन्द्र सिंहः घर आजा परदेसी, तेरा देश बुलाये रै!!

'मैं अकेला ही चला था, जानिबे मंजिल की ओर, लोग आते गये और कांरवा बनता गया'। पर, मानवेन्द्र सिंह के साथ विडम्बना ये है कि मंजिल की ओर जाने का रास्ता जो उन्होने चुना वो रिंग रोड़ निकला। ब्लैक काफी और बीड़ी के धुंए के बीच मानवेन्द्र सिंह दिल्ली में

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