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मोदी लहर से राजस्थान के कई राजनीतिक सितारे गर्दिश में

2014 के चुनावों ने भारत की राजनीति को बदल कर रख दिया। पर 2019 के चुनाव उससे भी महत्वपूर्ण है क्योकि ये चुनाव राजनीति की दिशा को बदल देगें। मोदी लहर की शुरुआत राजस्थान में दिसम्बर 2013 के विधानसभा चुनावों के साथ हुई पर राजस्थान के लिए 2014 से 2019

मारवाड़ में मोदी लहर बनी मृगमरिचिका

मारवाड़ के लू के थपेड़ो औऱ  राजनीति के गहरे बहते पानी के बीच मोदी लहर ठंडी सी पड गयी है। मारवाड़ की पांच लोकसभा सीटों में से तीन पर मोदी लहर का असर केवल मृगमरिचिका बन चुका है। यानि दिखाई तो दे रहा है पर वास्तविकता में है नही। मारवाड़

राजेन्द्र राठौड – राजनीति के जोकर के बदलते रंग

राजनीति की ताश में जोकर का रंग जरुर बदल सकता है पर उसकी औकात भी बदल जाए, ये जरुरी नही। ताश के खेल – पोकर, में जोकर का इस्तेमाल तिकड़ी बनाने के लिए तो किया जाता है पर जोकर कभी तुरुप नही होता। राजस्थान की राजनीति में राजेन्द्र राठौड का

ज्योति या हडुमान – नागौर का जाट धर्म संकट में

मारवाड़ ने नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा और रामरघुनाथ चौधरी जैसे दिग्गज नेता देखे है, पर जाट राजनीति में ऐसा संकट कभी नही आया। इस बार नागौर के जाट को अपना राजनीतिक भविष्य तय करना है। नागौर का जाट ये तय़ करेगा कि वो हनुमान बेनीवाल के संघर्ष के

राजस्थान में राजपूत स्वाभिमान की लडाई नागौर पहुंची

ना कोई लीड़र है और ना ही कोई बैनर, पर राजपूतो के स्वाभिमान की असली लड़ाई अब राजस्थान की सत्ता के केन्द्र – नागौर में लड़ी जाय़ेगी। इतिहास गवाह है कि मारवाड का राज भले ही जोधपुर से चलता हो पर जब भी युद्ध का ढोल गांवों में बजाया जाता

जनता का मुख्यमंत्री बनाम “क्यूट” उप-मुख्यमंत्री में बदली राजस्थान की लड़ाई

“कितना क्यूट है वो, सीएम तो बनना ही चाहिए” चुनावी समर के दौरान राजस्थान में दिल्ली के कई दिग्गज पत्रकार मधुमक्खी की तरह भिनभिनाते नजर आये। उनमें से ज्यादातर, विशेषकर महिला पत्रकारो में, जिज्ञासा ये थी कि क्या सचिन पायलेट राजस्थान के मुख्यमंत्री होगे या नही। इस क्यूटनेस का जादू प्रियंका

ओम माथुर फिर से वसुंधरा राजे की कुंड़ली के राहू साबित हुए !!

वसुंधरा राजे की कुंड़ली में ऐसा कोई योग नही जो उन्हे अनंत-विजय की ओऱ ले जाता है। पर, शनि की तगड़ी कृपा से उन्हे राजयोग की प्राप्ति हुई और बार बार उन्हे अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त हुई है। यज्ञ सिद्धी पर विश्वास रखने वाली वसुंधरा राजे ने, पीताम्बरा पीठ

2018 का चुनाव राजस्थान की जाट राजनीति को नयी दिशा देगा !!

राजस्थान में जाट राजनीति सबसे बड़ा फेक्टर है। वसुंधरा राजे ने पांच साल तक अपना तख्त जाटों के भरोसे ही बचाये रखा नही तो 2015 में उनकी ऱवानगी होना लगभग तय हो चुका थी। मोदी भी राजस्थान के जाटों से खौफ खाता है और यही कारण है कि वसुंधरा राजे

चुनावी नांव में हिचकोले खा रहे है राजस्थान की जनता के मुद्दे

नागौर में खरनाल के अलावा अगर कही वसुंधरा राजे जाट राणी होने के खटके दिखाने में विश्वास रखती है तो वो जगह है  - ओसियां। भोपालगढ़ के रिजर्व हो जाने के बाद मारवाड़ की जाट राजनीति का केन्द्र ओसियां है। आधे से ज्यादा खाली मैदान और ड़ूबते राजनीतिक सितारे का

क्या जल जायेगी राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की लंका !!

“लूम लपेटी लंक को जारा, लाह समान लंक जरी गयी।“ लंका तो पूरी तरह से जल जाने के करीब है – पर ये लंका है हडूमान की। पांच साल तक उछल कूद मचाने के बात राजस्थान में तीसरे मोर्चे की बात करने वाले हनुमान बेनीवाल केवल 67 विधानसभा सीटों पर ही

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