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हवामहल, आमेर औऱ चित्तोड का किला भी बेच देगी भाजपा – राजीव शुक्ला

जयपुर – पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य राजीव शुक्ला ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत की वित्त मंत्री ने अचानक घोषणा की है कि सरकारी सम्पत्तियों को बड़े उद्योगपतियों के निजी हाथों में सौंपकर 6 लाख करोड़ रूपये की उगाई केन्द्र सरकार करेगी जबकि किसी सरकार को ऐसा अधिकार नहीं है कि जनता के पैसों से 67 साल में जो धरोहर बनाई गई हों उस राष्ट्रीय सम्पत्ति को निजी उद्योगपतियों को सौंपे।

राजीव शुक्ला कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार जिस प्रकार से आम जनता के पैसे से बनी हुई राष्ट्रीय धरोहरों को चंद बड़े उद्योगपतियों को बेचने का कार्य कर रही है उसे आज रोका नहीं गया तो यह सरकार देश को बेच देगी। राजीव शुक्ला कहा कि केन्द्र सरकार पर आज लगाम नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में यदि भाजपा का शासन रहा तो राजस्थान के हवामहल, आमेर, चित्तौडग़ढ़ किला जैसी धरोहरों को भी बेचने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली का लाल किला भी निजी हाथों में केन्द्र सरकार ने लगभग सौंप दिया था किन्तु व्यापक विरोध होने के कारण इस योजना पर अमल नहीं हो सका। 

राजीव शुक्ला ने कहा कि जनता से वोट लेने के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं किन्तु सार्वजनिक सम्पत्तियों को निजी हाथों में बेचने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा 26700 किलोमीटर के नेशनल हाईवे, हमारे देश की रीढ कही जाने वाली रेलवे के 400 स्टेशन, 150 ट्रेन, रेलवे ट्रेक और कई रेल शैड बेचने की योजना बनाई गई है। इसी प्रकार 42300 सर्किट किलोमीटर ऑफ ट्रांसमिशन नेटवर्क तथा पावर जनरेशन 6000 मेगावाट, एनएचपीसी, एनटीपीसी तथा एनएलसी के हाइड्रो सोलर विंड एसेट बेचे जा रहे हैं।

राजीव शुक्ला ने कहा कि देशभर में रसोई गैस की सप्लाई हेतु गेल कम्पनी की नेशनल गैस पाईप लाईन जो कि 8000 किलोमीटर की है बेची जा रही है। इसी प्रकार इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा एचसीएल की 4000 किलोमीटर की पेट्रोलियम पाईप लाईन इस सरकार द्वारा बेची जा रही है। राजीव शुक्ला ने कहा कि देशभर में इंटरनेट और वाई-फाई का नेटवर्क देने वाली भारत नेट फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क जो 2.86 लाख किलोमीटर है निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इसी प्रकार देशभर में टेली कम्यूनिकेशन के मजबूत स्तम्भ बीएसएनएल तथा एमटीएनएल के टॉवर भी निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में अनाज के सरकारी गोदाम जो कि 210 लाख मैट्रिक टन फूड ग्रेन वेयर हाऊस हैं को भी निजी उद्योगपतियों को बेचा जा रहा है। राजीव शुक्ला ने कहा कि सभी राज्यों को सस्ता कोयला उपलब्ध करवाने वाली सरकारी कम्पनियों के 160 कोयला खदान तथा 761 मिनरल ब्लॉक बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि देश में 25 एयरपोर्ट, 9 बंदरगाह तथा 2 राष्ट्रीय स्टेडियम को भी केन्द्र सरकार बेच रही है। राजीव शुक्ला ने कहा कि सरकार द्वारा जो स्ट्रेटेजिक इण्डस्ट्री है जिससे आम जनता के हित सीधे-सीधे प्रभावित होते हैं उन्हें निजी हाथों में बेचकर देश की जनता के साथ धोखा किया जा रहा है।

राजीव शुक्ला ने कहा कि कोयले की खदानें, बिजली उत्पादन का नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और गोदाम के साथ ही यदि सूचना क्रांति के नेटवर्क वाई-फाई नेटवर्क, बीएसएनएल एवं एमटीएनएल के पोल निजी हाथों को सौंप दिये जायेंगे तो इन क्षेत्रों में निजी उद्योगपतियों की मनमानी हो जायेगी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में मोनोपोली नहीं हो तथा आम जनता का निजी उद्योगपतियों द्वारा शोषण नहीं हो इसलिये सार्वजनिक उपक्रम आवश्यक होते हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि बहुत सोच-समझकर पं. जवाहरलाल नेहरू स्टील एथोरिटी ऑफ इण्डिया जैसे सार्वजनिक उपक्रम लगाकर न सिर्फ लोगों को रोजगार प्रदान किया बल्कि स्टील उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी, एनटीपीसी तथा एनएलसी जैसे उपक्रम निजी हाथों में जाने के कारण बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी तथा जनता पर बेवजह मॅंहगाई का भार बढ़ेगा। इसी प्रकार यदि कोयला सप्लाई निजी हाथों में चली गई तो राज्य सरकारों को मॅंहगे दाम पर कोयला खरीदना पड़ेगा और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

राजीव शुक्ला ने कहा कि यह सभी उपक्रम कई वर्षों की मेहनत से पूर्ववर्ती सरकारों ने बनाये हैं तथा इनकी कीमत 60-70 लाख करोड़ से अधिक है, उसके बावजूद केन्द्र सरकार द्वारा इन राष्ट्रीय धरोहरों को मात्र 6 लाख करोड़ रूपये में निजी हाथों को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार अपनी कमियां छुपाने हेतु तर्क दे रही है कि सम्पत्तियों को बेचा नहीं लीज पर दिया जा रहा है, किन्तु 40 से 60 वर्ष की लीज पर इतनी कम कीमत पर इन सम्पत्तियों को देना इनके बेचे जाने के बराबर ही है। राजीव शुक्ला ने कहा कि कोई भी व्यक्ति सम्पत्ति खरीदता है तो उक्त सम्पत्ति सरकार से लीज पर मिलती है किन्तु सम्पत्ति पर खरीददार का मालिकाना हक होता है, इसलिये केन्द्र सरकार का लीज पर देने का तर्क फरेब के अलावा और कुछ नहीं है।

राजीव शुक्ला ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि केन्द्र सरकार आम जनता के पैसे से बनी सार्वजनिक सम्पत्ति को निजी हाथों में बेच रही है तथा उक्त सम्पत्ति को खरीदने हेतु उद्योगपतियों को सार्वजनिक बैंकों से ही ऋण भी उपलब्ध करवाया जायेगा। इस स्थिति में आम जनता पर दोहरा भार डाला जा रहा है। भविष्य में यदि सम्पत्ति बेचने वाले नहीं रहे और खरीदने वाले ऋण नहीं चुकायेंगे तो राष्ट्रीय धरोहर का तो नुकसान होगा ही, साथ में सार्वजनिक बैंकों जिन्होंने ऋण दिया है को आम जनता की गाढ़ी कमाई गवानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा उदाहरण पहली बार देखने को मिला है कि सम्पत्ति किराये पर दी जा रही है और किराया देने के लिये किरायेदार को ऋण भी सम्पत्ति के मालिक दे रहे हैं। 

राजीव शुक्ला ने कहा कि यदि केन्द्र सरकार देश में हाईवे बनाने में असक्षम है, रेल चलाने में असक्षम है, हवाई अड्डों की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते अथवा आम जनता को बिजली, रसोई गैस सप्लाई करने में परेशानी का अनुभव कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल सत्ता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा सार्वजनिक सम्पत्तियों को बेचने की जो प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है उस पर तत्काल विराम लगना चाहिए। 

राजीव शुक्ला ने कहा कि देश में लगातार रसोई गैस, पेट्रोल एवं डीजल के दाम केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ रहे हैं, जिस कारण से किराया एवं मालभाड़ा बढ़ गया तथा आम आदमी की आवश्यकता की वस्तुओं के दाम भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए शासन के दौरान अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम 105 से 120 डॉलर प्रति बैरल थे किन्तु देश में पेट्रोल 55 से 70 रूपये के बीच बिक रहा था, वहीं आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 22 डॉलर से 70 डॉलर के मध्य हैं किन्तु पेट्रोल के दाम दोगुने होकर 110 पहुंच गये हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पूर्ववर्ती सरकार के मुकाबले कच्चे तेल के दाम आधे हो गये किन्तु पेट्रोल के दाम देश में दोगुने हो गये हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस के दामों में बढ़ोत्तरी कर केन्द्र सरकार ने आम जनता को लूटकर 22 लाख करोड़ रूपये कमाये हैं किन्तु उसके बावजूद देश की धरोहर बेचने का कार्य केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। राजीव शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी डिमोनेटाईजेशन करते हैं तथा वित्त मंत्री मोनेटाईजेशन कर रही है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी तथा गलत प्रकार से जीएसटी लागू होने के कारण पहले ही अधिकांश उद्योग-धंधों की कमर टूट गई है किन्तु केन्द्र सरकार राहत देने की बजाए सब तरफ से वसूली कर रही है। राजीव शुक्ला ने कहा कि लॉक डाउन लागू होने के पश्चात् आम जनता को राहत प्रदान करने अथवा छूट प्रदान करने का कोई कार्य केन्द्र सरकार ने नहीं किया बल्कि जीएसटी एवं इनकम टैक्स की वसूली हेतु हथकण्डे अपनाये जा रहे हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि देश में बढ़ती मॅंहगाई ने सभी सीमाएं पार कर ली हैं, किन्तु केन्द्र सरकार द्वारा आम जनता को राहत प्रदान करने हेतु इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती मॅंहगाई को काबू करने में नाकाम रही केन्द्र सरकार तथा राष्ट्रीय धरोहरों को बेचने का काम करने वाली ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिये जनता तत्पर है तथा कांग्रेस पार्टी आम जनता के साथ उनके हितों की रक्षा हेतु सदैव संघर्ष करती रहेगी।

इस अवसर पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि देश की सार्वजनिक सम्पत्तियों को निजी हाथों में सौंपने वाली केन्द्र सरकार देश में बढ़ती मॅंहगाई को काबू करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी आम जनता के बीच जायेगी तथा जनता के हितों की रक्षा के लिये केन्द्र सरकार के विरूद्ध संघर्ष करने में कांग्रेस कार्यकर्ता कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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