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किसानों को वीसीआर के नाम पर प्रताड़ित करना बंद करे गहलोत सरकार: डॉ सतीश पूनियां

जयपुर – प्रदेश के गांव, शहर और कस्बों में चल रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां ने बयान जारी कर कहा कि, कांग्रेस सरकार के शासनकाल में बिजली उत्पादन व वितरण का कुप्रबंधन है, जिससे आमजन, किसान और व्यापारी परेशान हैं।

डॉ सतीश पूनियां ने कहा कि सबसे महंगी बिजली राजस्थान में है, पिछले डेढ साल में जब कोरोना व लॉकडाउन से परेशान जनता व व्यापारी अपने बिजली के बिलों में रियायत की उम्मीद कर रहे थे, तब प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने कई बार अलग-अलग माध्यमों से बिजली की दरों में बढोतरी की, जिसकी वजह से आमजन, किसान व व्यापारियों के जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।

डॉ सतीश पूनियां ने कहा कि, राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन, कोयला कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं करने के कारण कई पॉवर प्लांट बंद हो गये, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती से आमजन परेशान है। 

कांग्रेस सरकार समय पर प्रबंधन करने के बजाय केन्द्र सरकार पर झूठे व तथ्यहीन आरोप अपनी विफलताओं को छिपा रही है। उन्होंने कहा कि, राज्य के बिजली घरों को रोजाना जो निर्धारित रैक कोयला उपलब्ध रहता है, वो राज्य सरकार के कुप्रबंधन के कारण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हर वर्ष मानसून के समय खदानों में पानी भर जाता है,  विद्युत कंपनियों को कोयला का पर्याप्त रूप में 25-30 दिन का स्टॉक रखना होता है, लेकिन कुप्रबंधन एवं वित्तीय विफलता के कारण राज्य सरकार कोयला का प्रबंधन करने में विफल रही। इस दौरान बिजली कंपनियां बिजली सप्लाई व डिमांड का सही आकलन नहीं कर पाई।

केन्द्र की मोदी सरकार बिजलीघरों को लगातार कोयला आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, राज्य की हरसंभव सहायता भी कर रही है। लेकिन कांग्रेस के शासन में उपभोक्ताओं से भारी लूट की जा रही है एवं दो माह के बजाय एक माह में बिजली के बिल जारी किये जा रहे हैं। 

बिलों में स्थायी शुल्क सहित विभिन्न करों से सरकार उपभोक्ताओं से लूट रही है। किसानों को वीसीआर के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है, ल़ॉकडाउन में भी वीसीआर भरी गई, इससे किसान कर्ज में डूब गये हैं और ढाई साल पहले किया गया सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी का वादा भी सरकार ने पूरा नहीं किया है, जो किसानों के साथ बड़ा छलावा गहलोत सरकार ने किया है।

डॉ सतीश पूनियां ने कहा कि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि  राज्य बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है, फिर क्यों उपभोक्ताओं से 8 रुपये से लेकर 13 रुपये यूनिट तक वसूले जा रहे हैं। बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो रहा, ना ही फाल्ट सुधार का समाधान हो रहा है। इसके बावजूद भी सबसे महंगी बिजली राजस्थान के लोगों को मिल रही है। 

कांग्रेस सरकार ने अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में सात बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया। कोरोनाकाल में भी तीन बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ाकर उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है।

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