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मारवाड़ के जाट को जानना है मानवेन्द्र सिंह के मांझी का नाम

राजस्थान में वसुंधरा राजे जब से आयी है, ऐसा कोई भी नेता कभी नही उबर पाया जिसका हाथ पकड़ कर उन्होने फोटो खींचा ली हो। चाहे वो किरोड़ी बैंसला हो या फिर किरोड़ी मीणा। मदन दिलावर आज तक अपने हालात पर रोते नजर आते है, वही हरिशंकर भाभड़ा से लेकर ललित किशोर चतुर्वेदी तक भाजपा की एक लंबी फेहरिस्त है जो गुमनामी के अंधेरे में खो गये और अस्ताचल की तरफ चले गये। मानवेन्द्र सिंह उनसे भी एक कदम आगे निकल गये है, उनके साथ फोटों खिंचवाना भी इन चुनावों में कांग्रेस के कुछ दिग्गज नामों का भविष्य तय कर सकता है।  

बाडमेर का फोकस मानवेन्द्र सिंह पर है, इसलिए नही कि वे इलाके के बड़े प्लेयर है पर इसलिए कि उनके सहारे कौन कौन सा नेता अपनी राजनीतिक रोटियां पकाना चाहता है। पहले भाजपा का दामन छोड़ कर धन्यवाद यात्रा पर निकले और अब उनके समर्थक अफवाह उड़ा रहे है कि वे 13 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस पार्टी जाइन करेगें। मारवाड़ के किसानों को भी इंतजार है कि मानवेन्द्र सिंह अगर कांग्रेस जाइन करते है तो कौन कौन कांग्रेसी नेता उनके साथ फोटो खींचवाता है। ये बात तय है कि जिसका फोटो खिंच गया उसके राजनीतिक करियर के कश्ती वहां ड़ूबेगी जहां पानी कम है।

वैसे भी कुछ राजपूत नेताओं का मानना है कि उन्होने स्वाभीमान रैली में जोर इसलिए लगाया कि मानवेन्द्र सिंह भाजपा को छोड़ने की घोषणा कर दे। वे कांग्रेस में आते है या नही, इससे जोधपुर, नागौर, शेखावाटी, बीकानेर की राजनीति पर कोई असर नही पड़ता। पर, भाजपा को बडा नुकसान जरुर हो सकता है।

राजस्थान में राजपूत वसुंधरा राजे से तगड़ा नाराज है पर क्या वोट कांग्रेस को देगा, ये निश्चित रुप से कोई नही कह सकता। मानवेन्द्र सिंह तो दिल्ली में अपने संबधों के चलते कल को भाजपा में वापसी भी कर सकते है पर उन छोटे खिलाड़ियों का क्या होगा जो उनके पीछे अपना राजनीतिक साका करने के लिए केसरियां बांध रहे है। पर, असली राजा वही है जो अपने समर्थकों को जाति, बिरादरी, रोटी, बेटी औऱ जीत मिलने पर लूट की आशा की अफीम खिला कर मरने-मारने को उतारु रखे। वैसे भी बाड़मेर की अपनायत में रिय़ाण का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

खैर, स्थानीय जोड़ बाकी की बात तब होगी, जब पाला मंड जायेगा। अभी तो सभी की नजरे मानवेन्द्र सिंह औऱ 24 अकबर रोड़ पर टिकी है। अगर 13 अक्टूबर को मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस का दामन थामते है तो वहां मानवेन्द्र से ज्यादा नजरे अशोक गहलोत और सचिन पायलट पर होगी। मारवाड़ में जाट ये जानना चाहता है कि मानवेन्द्र सिंह को कांग्रेस में आखिर ला कौन रहा है।

जिसका फोटों खींच जायेगा, वो उसे फ्रेम करवाने की तैयारी भी कर लें।

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