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राजस्थान में जिला न्यायालयों को विडियों कांफ्रेसिंग से जोड़ा, 1242 कोर्ट में मिलेगी सुविधा

जयपुर – राजस्थान के न्यायालयों में आज एक नए अध्याय की शुरूआत हुई। न्यायालय में गवाह अपना बयान अब विडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से दर्ज करा सकता है। बनीपार्क कोर्ट जयपुर एवं गंगानगर कोर्ट के न्यायाधीशों ने आज इस कार्य को प्रारंभ कर एक नई शुरूआत की है। दोनों न्यायाधीशों की पहल से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उच्च न्यायालय में वीसी के जरिए दिए जाने वाले बयान को लेकर 2 अगस्त, 2021 को रूल्स नोटिफाई कर दिए है। राज्य सरकार ने इसके लिए सीआरपीसी में संशोधन किया है।

विशिष्ट शासन सचिव, गृह, वी सरवन कुमार ने बताया कि गवाह को कई किलोमीटर की यात्रा के बाद कोर्ट में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने से निजात मिलेगी। गवाह जिला न्यायालय के परिसर में विडियों कांफ्रेसिंग रिमोट पाइंट के स्टूडियो में जाकर विडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से अपना बयान दर्ज करा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रथम फेज के रूप में सभी जिला न्यायालयों को विडियों कांफ्रेसिंग रिमोट पाइंट से जोड़कर स्टूडियो बनाया गया है। इन स्टूडियो पर कॉडिनेटर नियुक्त किया गया है, जो कोर्ट का कर्मचारी है।

वी सरवन कुमार ने बताया कि प्रदेश की 1242 कोर्ट के लिए विडियों कांफ्रेसिंग का हार्डवेयर इन्स्टॉल किया गया है। माइक्रोसाफ्ट टीम का लाईसेंस एवं फाइबर इंटरनेट कनेक्टिविटी दी गई है। दूसरे फेज में तालुका कोर्ट में विडियों कांफ्रेसिंग रिमोट पाइंट बनाया जाएगा। सरकारी ऑफिस एवं अस्पताल को भी इससे जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा विडियों कांफ्रेसिंग के रूल्स नोटिफाई करने के बाद समय पर गवाह का बयान हो सकेगा। सरकारी खर्चे एवं समय की बचत होगी तथा ट्रायल भी जल्द ही संभव होगा। पारदर्शिता के साथ पूरी प्रक्रिया संम्पन्न होने से कोर्ट केस के लंबित मामलों में कमी आएगी।

आईपीएस शरत कविराज ने विडियों कांफ्रेसिंग के जरिए दर्ज कराया राज्य का पहला बयान

एसओजी में डीआईजी श्री शरत कविराज पहले आईपीएस अधिकारी है जिन्होंने इस सुविधा का उपयोग कर अपना बयान दर्ज कराया। कविराज एसीबी मामले में अभियोजन स्वीकृति देने के मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में जयपुर मेट्रोपोलिटन कोर्ट के विडियों कांफ्रेसिंग रूम में उपस्थित होकर गंगानगर कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। इस मामले का ट्रायल गंगानगर कोर्ट में चल रहा है।  श्री शरत कविराज का कहना है कि मुझे गंगानगर कोर्ट में गवाह के रूप में बयान देने के लिए करीब 1000 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती तथा तीन दिन सरकारी कार्यालयों में अनुपस्थित रहना पड़ता। अब राज्य सरकार एवं उच्च न्यायालय की इस पहल से समय की बचत होगी एवं ट्रायल भी तेज होगा।

यह है वीसी से बयान देने की प्रक्रिया

इस प्रक्रिया के तहत पीपी के द्वारा अदालत से वीसी के माध्यम से साक्ष्य की अनुमति देने का अनुरोध किया जाता है। एक बार जब कोर्ट अनुमति दे देता है तो कोर्ट के अधिकारियों द्वारा विडियों कांफ्रेसिंग स्लॉट बुक कर लिया जाता है। गवाह को जिला कोर्ट परिसर के वीसी रिमोट पाइंट में जाना होता और गवाही देनी होती है। विवरण मेल द्वारा भेजा जाता है जिसे हस्ताक्षरित और स्केन करकर वापस कर दिया जाता है तथा मूल हस्ताक्षरित दस्तावेज गवाह के आईडी एवं दस्तावेज के साथ भौतिेक रूप से भेजा जाता है।

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