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सचिन पायलट – राजस्थान में डूबती भाजपा के तारणहार

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की बांछे खिली हुई है। जब से राहुल गांधी ने धौलपुर से लेकर बीकानेर तक की यात्रा में सचिन पायलट के भावी मुख्यमंत्री होने का लुका छिपा सा संदेश दिया है, भाजपा का उत्साह दुगुना हो गया है। अजमेर में नरेन्द्र मोदी की रैली की विफलता और अमित शाह में रैलियों में पडने वाले भीड़ के टोटे के बाद भी राजस्थान में भाजपा को सत्ता में वापसी की गंध कही दूर से आ रही है। कारण है – सचिन पायलट।

ऱणकपुर में भाजपा के टिकिटों को लेकर होने वाली गुत्थम-गुत्था होटल के गेट के बाहर जरुर थी पर सयानों के बीच माहौल काफी दोस्ताना रहा। चर्चा भाजपा की टिकिटों की बजाय राहुल गांधी द्वारा सचिन पायलट के कांग्रेस का चेहरा होने की लगभग घोषणा का संकेत रहा। बैठक से एक दिन पहले ही अपनी गोल काया औऱ गोल घूमने वाली आंखों के साथ गोल गोल बाते करने वाले संगठन मंत्री चंद्रशेखर इतने उत्साहित थे कि उन्होने फेसबुक पर सीधा सपाट बयान दे डाला कि पार्टी राजस्थान में निश्चित विजय की ओर बढ रही है। कुमारी शैलजा की मीटिंग से अश्क अली टांक और नरेन्द्र बुड़ानियां को बाहर फिकवायें जाने की खबर के चटखारे का मजा रणकपुर में भाजपाई नेताओं के लिए होटल के खमणं ढोकले से ज्यादा था। दोनों ही अशोक गहलोत के करीबी माने जाते है और बैठक में मौजूद नेताओं को इनकी मौजूदगी से अंदरखाने हुई बात लीक होने का अंदेशा था।

पर, अगर गालिब गहलोत की राजनीति के लिए शैर कहते तो इन हालातों में यही कहते – है और भी दुनिया में सुखनबर बहुत अच्छे, पर कहते है कि गालिब का है अंदाजे बयां और।

खैर, भाजपा अब प्रोजेक्ट 180 में जुट गयी है। हनुमान बेनीवाल और कर्नल सोनाराम अपने बेटे के जरिये जाट वोटों को कांग्रेस की तरफ न जाने देने के लिए जोर लगा रहे है। दूसरी ओऱ किरोडी लाल मीणा की मंद मुस्कुराहट अब दोनो कानों तक पहुंच रही है औऱ एक कोने से टूटा हुआ दांत भी दिखने लगे है। उनकी राजनीति की मंद सासों को मानों ठंड़ी हवा का झोका छू गया हो। उन्हे विश्वास है कि पूर्वी जिलों का मीणा कभी भी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस को वोट नही करेगा। ऐसे में दलित सीटों पर भी वोटों के लिए मारामारी बढ़ सकती है क्योकि अभी तक कई जगहों पर मीणा-जाटव-कोली-दलित वोट अपनी अपनी स्थानीय राजनीति के मुताबिक एक जगह होने के लिए कवायद कर रहे थे।

महाराजा विश्वेन्द्र सिंह को साईड लाईन कर अपने प्यादों के सहारे राजनीति करने का सचिन पायलट का दांव भी पूर्वी जिलों में रिवर्स क्लीन स्वीप साबित हो सकता है। कांग्रेस ने वैर का विधानसभा उपचुनाव विश्वेन्द्र सिंह के भरोसे ही जीता था पर उस समय संबध ठीक थे तो जीत का सेहरा सचिन पायलट को बंधा। बेनीवाल अगर भाजपा के खिलाफ जाने वाले जाट वोटों का पाल बांध पाते है तो पूर्वी राजस्थान के सिवा ऐसा कोई इलाका नही था जहां कांग्रेस क्लीन स्वीप का सपना देख सकती थी। मेवाड़ में अंदरखाने की लड़ाई से पार पाना सचिन पायलट के बस का काम नही और वहां से चढौतरा कभी भी हो सकता है।

लब्बोलुआब ये कि सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की आहट से ही मीणा और जाट दोनों के कान खड़े हो गये है। रणकपुर में वसुंधरा राजे की खुशी छिपाये नही छिप रही थी। लगता यही है कि शनिवार को हुई कड़कनाथ की कुर्बानी काम आ गयी।  

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